बिना किसी खास वजह के थकान महसूस होना, बात-बात पर चीज़ें भूल जाना, या हाथ-पैरों में अजीब सी झुनझुनी, शुरुआत में लोग इसे स्ट्रेस या नींद की कमी समझकर टाल देते हैं। पर कई बार असली वजह कुछ और होती है: विटामिन बी12 की कमी। और सबसे दिलचस्प बात ये है कि यह कमी अक्सर सालों तक चुपचाप बढ़ती रहती है। भारत में यह समस्या और भी आम है, खासकर शाकाहारी लोगों में, जिसकी वजह एकदम सीधी है: बी12 ज्यादातर सिर्फ नॉनवेज और डेयरी चीज़ों में ही मिलता है।
विटामिन बी12 करता क्या है शरीर में?
शरीर विटामिन B12 का इस्तेमाल एक साथ कई तरह से करता है। यह रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाओं) को बनाने, नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) के सही ढंग से काम करने और DNA बनाने में मदद करता है। दूसरे शब्दों में, यह निश्चित रूप से कोई साधारण विटामिन नहीं है।
इस मिनरल के बिना, शरीर रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता और मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो जाता है, जो एनीमिया का ही एक प्रकार है। इसके अलावा, B12 की कमी से हाथों और पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन हो सकता है क्योंकि नसों को इस विटामिन की ज़रूरत होती है, और इससे चलने-फिरने में भी दिक्कत हो सकती है।
कमी के लक्षण क्या-क्या हैं?
- लगातार कमजोरी महसूस होना
- याददाश्त कमजोर पड़ना
- हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
- त्वचा का हल्का पीलापन
- मूड में उतार-चढ़ाव, कभी-कभी डिप्रेशन जैसा महसूस होना
- मुंह में छाले, जीभ में सूजन
- सांस फूलना, चक्कर आना
ये लक्षण अक्सर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए लोग महीनों तक इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो एक बार ब्लड टेस्ट करवा लेना ही सबसे सीधा रास्ता है।
किन्हें ज्यादा खतरा रहता है?
- जो लोग पूरी तरह शाकाहारी या वीगन डाइट पर हैं
- उम्र में बड़े लोग, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की बी12 सोखने की क्षमता कम होती जाती है
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
- जो लोग लंबे समय से मेटफॉर्मिन (डायबिटीज़ की दवा) या एसिडिटी की कुछ खास दवाएं ले रहे हैं
- पेट या आंत से जुड़ी कुछ बीमारियां जिनमें शरीर बी12 को ठीक से सोख नहीं पाता
किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें, अभी जाँच करवाएँ - विटामिन B12 टेस्ट
अब बात करते हैं - क्या खाएं?
नॉनवेज खाने वालों के लिए: मांस, मछली, अंडा और चिकन बी12 के बेहतरीन स्रोत हैं। सिर्फ दो अंडे रोज़ की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर देते हैं।
शाकाहारियों के लिए: यहीं असली चुनौती शुरू होती है, ईमानदारी से कहें तो। दूध, दही, पनीर, चीज़, ये डेयरी चीज़ें ठीक-ठाक बी12 देती हैं, बशर्ते रोज़ खाई जाएं। फोर्टिफाइड सीरियल और न्यूट्रिशनल यीस्ट भी अच्छे विकल्प हैं, हालांकि भारत में ये उतनी आसानी से हर घर में नहीं मिलते।
एक बात साफ समझ लीजिए, पौधों में प्राकृतिक रूप से बी12 नहीं होता। मशरूम, जैसी चीज़ों में थोड़ी बहुत मात्रा हो सकती है, पर उतने भरोसे लायक नहीं कि सिर्फ उन्हीं पर निर्भर रहा जाए। जो लोग वीगन हैं, उन्हें लगभग हमेशा सप्लीमेंट लेना ही पड़ता है, यह कोई विकल्प नहीं, जरूरत है।
रोज़ाना कितना बी12 चाहिए?
एक आम वयस्क को रोज़ाना लगभग 2.4 माइक्रोग्राम B12 की ज़रूरत होती है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान यह मात्रा थोड़ी बढ़ जाती है। ज़्यादातर मांसाहारी लोग बिना किसी खास कोशिश के इतनी मात्रा ले लेते हैं, लेकिन शाकाहारियों में अक्सर इसकी काफ़ी कमी पाई जाती है; यही वजह है कि रिसर्च में शाकाहारियों के एक बड़े हिस्से में B12 की कमी देखी गई है।
सप्लीमेंट लेना कब जरूरी हो जाता है?
अगर टेस्ट में कमी कन्फर्म हो गई हो, तो डॉक्टर अक्सर सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं, चाहे टैबलेट के रूप में हो या ज्यादा गंभीर मामलों में इंजेक्शन के जरिए। कमी कितनी पुरानी है और शरीर इसे कितना सोख पा रहा है, इस पर निर्भर करता है कि कौन सा तरीका सही रहेगा। खुद से कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात कर लेना बेहतर रहता है, खासकर अगर पहले से कोई दवा चल रही हो।
सुधार में कितना वक्त लगता है?
अच्छी खबर ये है कि बी12 की कमी का इलाज ज्यादातर मामलों में सीधा-सादा है। सप्लीमेंट शुरू करने के कुछ हफ्तों में ही थकान और एनर्जी लेवल में सुधार दिखने लगता है। पर अगर झुनझुनी या नर्व्स से जुड़े लक्षण काफी वक्त से थे, तो उनमें सुधार आने में महीनों लग सकते हैं, कभी-कभी पूरी तरह ठीक होने में भी वक्त लगता है, इसलिए जितनी जल्दी कमी पकड़ में आए, उतना अच्छा।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर लगातार थकान, याददाश्त की समस्या, हाथों-पैरों में झुनझुनी या पहले बताए गए कोई भी लक्षण हफ़्तों से बने हुए हैं, तो इंतज़ार न करें। एक साधारण ब्लड टेस्ट से B12 का लेवल पता चल सकता है, और अगर कमी पाई जाती है, तो इसका इलाज बहुत आसान है। जल्द इलाज शुरू करना सबसे अच्छा है, खासकर नसों से जुड़े लक्षणों के मामले में, क्योंकि लंबे समय तक कमी रहने से ऐसा नुकसान हो सकता है जिसे ठीक होने में समय लगता है।
निष्कर्ष
विटामिन बी12 दिखने में एक छोटा सा नाम लगता है, पर शरीर में इसका काम बहुत बड़ा है, खून बनाना हो या नर्वस सिस्टम को दुरुस्त रखना। शाकाहारी हैं तो थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, बस इतनी सी बात है। डेयरी चीज़ें नियमित खाइए, अगर जरूरत लगे तो टेस्ट करवाइए, और अगर कमी निकले तो सप्लीमेंट लेने में देर मत कीजिए, यह उन चीज़ों में से है जिन्हें समय रहते ठीक करना बेहद आसान है।



